हिंदी में जापान को "उगते सूरज का देश" क्यों कहा जाता है?

उगते सूरज की भूमि

हिंदी में जापान को "उगते सूरज का देश" कहने के कारण।

जापान को अक्सर हिंदी और दुनिया भर की भाषाओं में "उगते सूरज का देश" कहा जाता है। जापानी भाषा में, इस देश को निहॉन (निप्पन) कहा जाता है। निहॉन और जापान दोनों एक ही शब्द से आते हैं; जिनका शाब्दिक अर्थ है, "जहाँ सूरज उगता है”।

इतालवी व्यापारी और यात्री, मार्को पोलो, ने 13वीं शताब्दी में पश्चिमी दुनिया को जापान से परिचित करवाया था। उन्होंने वास्तव में कभी जापान की यात्रा नहीं की, बल्कि उसके बजाय वो चीन के दक्षिणी हिस्से में गए थे। वहां पर लोगों ने उन्हें जापान के बारे में बताया। दक्षिण चीन के लोगों के लिए, जापान उस दिशा में स्थित है, जहाँ से सूरज उगता है। इसलिए, लोग इसे जी-पैंग या ज़ू-पैंग कहते थे, जिसे "सूरज के उद्गम" के रूप में भी अनुवादित किया जा सकता है, जिसका अर्थ है, वो जगह जहाँ से सूरज निकलता है। जापान के लोग जापानी भाषा में देश को दर्शाने के लिए 日本 लिखते हैं। जिसे निप्पन या निहॉन बोला जाता है।

चीनी लोगों ने जापान को जी-पैंग या ज़ू-पैंग (जिसे日本 के रूप में लिखा जाता है) क्यों कहना शुरू किया इसके और भी कारण हैं। सही तरीके से कहा जाए तो 6वीं सदी (सही वर्ष ज्ञात नहीं है) के अंत के आसपास, जापान की सरकार ने देश को निहॉन कहना शुरू कर दिया था। 7वीं सदी तक, जापान को चीनी अक्षर 倭 के प्रयोग से "वा" या "यमातो" कहा जाता था।

जब जापानी सरकार ने 7वीं शताब्दी की शुरुआत के आसपास चीनी सरकार को एक स्वायत्त संदेश भेजा था, तब इसने "उगते सूरज का देश" जैसे शब्द का इस्तेमाल किया था। जापानी सरकार ने 8वीं शताब्दी में देश का नाम वा (यमातो) से बदलकर निहॉन (निप्पन) रख दिया था। दिलचस्प बात यह है कि देश का नाम रखते समय जापानियों ने चीनी सरकार को ध्यान में रखा था, शायद इसलिए क्योंकि वो चीन को अपनी प्रतिष्ठा दिखाना चाहते हैं, क्योंकि जापान वहां स्थित है जहाँ से चीनी लोगों के लिए सूर्य उगता है, न कि जापानियों के लिए।

इसी वजह से जापान को हिंदी और दुनिया की कई दूसरी भाषाओं उगते हुए सूरज का देश कहा जाता है।

जापान के राष्ट्रीय झंडे को "उगते हुए सूरज का झंडा" कहते हैं। 7वीं शताब्दी की शुरुआत में, पहली बार बीच में सूरज वाले जापानी झंडे का इस्तेमाल किया गया था। हालाँकि, ऐसा कहा जाता है कि उस समय के झंडे का रंग अभी के रंगों से अलग था। उस समय के झंडे में पीले रंग का सूरज और लाल पृष्ठभूमि होती थी। एदो युग के अंत समय में, अपनी राष्ट्रीयता दिखाने के लिए इस झंडे को जहाज़ों पर इस्तेमाल किया जाता था। इसके अलावा, इसे कई दूसरे स्थानों पर भी इस्तेमाल किया जाता था।

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